हिमालय दिवस हिमालय के समग्र विकास का चिंतन – डॉक्टर निशंक

डोईवाला से ज्योति यादव की रिपोर्ट:—-

डोईवाला:–हिमालय दिवस के कार्यक्रम में हिमलायीय विश्वविद्यालय में मुख्य अतिथि के रूप में डॉक्टर निशंक ने हिमालय दिवस के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुएय कहा कि यह हिमालय के समग्र के विकास का चिंतन है

डॉक्टर निशंक ने कहा क़ि हिमालय से आने वाला हर एक व्यक्ति इस बात को भलीभांति से समझ सकता है कि अगर हिमालय से जरा भी छेड़छाड़ हुई तो प्रकृति हमें माफ नहीं करेगी । हमें इस बात पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है कि सामुदायिक भागेदारी बढ़ाते हुए, सभी हितधारकों में आपसी समन्वय स्थापित करते सतत विकास लक्ष्यों के प्रति पूर्ण समर्पण से सुनियोजित विकास के नए स्वर्णिम युग का सूत्रपात कर सकते हैं
हिमालयीय विश्वविद्यालय में ‘हिमालय दिवस’ के अवसर पर पौधारोपण किया गया। यह कार्यक्रम कुसुमकांता फाउंडेशन और मंथन सोसाइटी के साथ संयुक्त रूप से किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पद्मश्री कल्याण सिंह रावत “मैती” रहे। मुख्य अतिथि द्वारा हिमालय दिवस मनाने के उद्देश्य को बताया गया। उनहोने कहा क़ि हमें केवल पेड़ लगाने तक सीमित न रहकर पेड़ों की रक्षा करनी चाहिए । उन्होंने बताया क़ि मैती अभियान में आठ लाख विवाहों में पौधारोपण हुआ
उन्होंने अपने स्रोतों , नदियों प्रदूषण बचाने क़ी आवश्यकता पर बल दिया
कार्यक्रम विश्वविद्यालय में “हिमालय प्रतिज्ञा” और पौधारोपण के साथ समाप्त किया गया। इस अवसर पर कुसुमकांता फाउंडेशन की संस्थापक सुश्री विदुषी ‘निशंक’, मंथन सोसाइटी की अध्यक्ष डॉ पूजा पोखरियाल हिमालयीय विश्वविद्यालय की कोषाध्यक्ष श्रीमती आरुषि ‘निशंक’ ,विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रो पी के भारद्वाज, कुलपति डॉ जे पी पचौरी, प्रति कुलपति डॉ राजेश नैथानी, हिमालयीय आयुर्वेदिक कॉलेज के प्राचार्य डॉ ए. के. झा, रजिस्ट्रार डॉ निशांत राय जैन, निदेशक प्रो. चिन्नपन्न बास्कर, विभिन्न संकाय सदस्यों एवं विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ ममता कुँवर द्वारा किया गया।

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