कोरोना योद्धा कोमा में, प्रशासन नही ले रहा सुध


नवीन बडोनी की स्पेशल रिपोर्ट
लॉक डाउन में प्रवासियों को उनके घर तक पंहुचाने में प्राइवेट बस चालको का काफी योगदान रहा सरकार ने इन्हें भी कोरोना योद्धा माना ऐसे ही ऋषिकेश के रहने वाले बस चालक है ऋषि बल्लभ भट्ट,


जो 28 मई को जब प्रवासियों को कीर्तिंनगर छोड़कर वापसी कर रहे थे तो पंत गांव के पास उनकी बस अनियंत्रित होकर खाई में गिर गई और वे गम्भीर घायल हो गए तबसे वे हिमालयन अस्पताल में कोमा में पड़े है लेकिन प्रशासन उनकी सुध नही ले रहा जबकि परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा है ऋषि बल्लभ टीजीएमओ की बस चलाते हैं उनकी स्थिति नाजुक बनी हुई है

उनके इलाज में परिवार का काफी पैसा भी खर्च हो चुका है परिवार में 2 जवान बेटियां और एक बेटा है! बेटा भी गंभीर बीमारी से जूझ रहा है ऋषि बल्लभ भट्ट अभी वेंटिलेटर पर हैं हॉस्पिटल प्रशासन का कहना है जब तक आयुष्मान कार्ड है तब तक रखेंगे उसके बाद आप को घर ले जाना पड़ेगा ऐसे में बस मालिक ने भी मुंह फेर लिया है.अब परिवार आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहा है ऋषि बल्लभ परिवार में अकेले कमाने वाले थे,ऐसे में करे तो क्या करे न तो सरकार और न कोई सामाजिक संस्था मदद के लिए नहीं आ रही है ऋषि बल्लभ की बेटी मीनाक्षी अब सरकार से गुहार लगा रही है क्योकि मकान का किराया देने के लिए भी पैसे नही है


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